परवाना ए मोहब्बत हूँ रूह बनके शमां में समा जाओ ।
सजह मेरे बनके दिल जिस्म में धडको चौबारे बरस जाओ ।
बहुत सताती हैं सजन खामोशिया ए मोहब्बत तुम्हारी ।
बनके के कोकिल बनकी दिल में तुम चहको हमको सताओ।
बहुत कुछ कहती है मेरे यार खामोशी तुम्हारी । चेहरा आईना ए दिली जजबात यार होता है।। मनोहर सतोगिया
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