तुम सरिता सरस सलील अति पावन।
तुम निर्झरणी सुखद मन अति भावन।
पर्वतो की गोद खेलती कुदती सावन।
हवाओं संग राग छेडती मन भावन ।
तुम निर्झरणी सुखद मन अति भावन।
पर्वतो की गोद खेलती कुदती सावन।
हवाओं संग राग छेडती मन भावन ।
बहुत कुछ कहती है मेरे यार खामोशी तुम्हारी । चेहरा आईना ए दिली जजबात यार होता है।। मनोहर सतोगिया