वो अल्फाज कहाँ से लाऊ जिनसे छवि तेरी बनाऊ।
तू ही बता कैसे चाँद की चाँदनी को चिराग दिखाऊ।
मनोहर सतोगिया
तू ही बता कैसे चाँद की चाँदनी को चिराग दिखाऊ।
मनोहर सतोगिया
बहुत कुछ कहती है मेरे यार खामोशी तुम्हारी । चेहरा आईना ए दिली जजबात यार होता है।। मनोहर सतोगिया
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