दिली जजबातो से रचित रचना दिल को रास आई।
दिल की नन्ही कुमुदनी फिर खिली और मुस्काई।
मनोहर सतोगिया
दिल की नन्ही कुमुदनी फिर खिली और मुस्काई।
मनोहर सतोगिया
बहुत कुछ कहती है मेरे यार खामोशी तुम्हारी । चेहरा आईना ए दिली जजबात यार होता है।। मनोहर सतोगिया
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