हालाते हाजरा बया करते हैं अलौकिक अल्फाज तुम्हारे । खनकते हैं चहकते हैं बया कर रहे हैं कुदरती नजारें। मनोहर सतोगिया
Wednesday, November 27, 2019
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बहुत कुछ कहती है मेरे यार खामोशी तुम्हारी । चेहरा आईना ए दिली जजबात यार होता है।। मनोहर सतोगिया
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