तेरे मादक अल्फाजो की खनक से कतई अंजान नहीं हूँ ।
अभी तलक कहाँ था मैं तनिक भी हैरान नहीं परेशां हूँ मैं।
मनोहर सतोगिया
अभी तलक कहाँ था मैं तनिक भी हैरान नहीं परेशां हूँ मैं।
मनोहर सतोगिया
बहुत कुछ कहती है मेरे यार खामोशी तुम्हारी । चेहरा आईना ए दिली जजबात यार होता है।। मनोहर सतोगिया
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