Sunday, November 10, 2019

औरत

जिन्दगी का पर्याय है औरत 
बगैर औरत के अधूरा है आदमी 
एक नई इबारत है औरत 
आदमी की जरूरत है औरत 
 तलवार की धार है औरत 
कलम का उपसंहार है औरत 
कभी झांसी की रानी कभी भगवती का अवतार है औरत 
कभी तुलसी का स्वरूप है औरत कभी दुर्गावती का अवतार है औरत 
कभी ताजा हवा का जोखा कभी उर्वशी मोहब्बतों एतबार है औरत

0 comments:

Post a Comment