जुगनुओं की चमक से अमवस्या की रात रंगीन होती है।
मोहब्बत की महक से कायनातों फिजा हरेक सुब शाम रंगीन होती है।
मनोहर सतोगिया
मोहब्बत की महक से कायनातों फिजा हरेक सुब शाम रंगीन होती है।
मनोहर सतोगिया
बहुत कुछ कहती है मेरे यार खामोशी तुम्हारी । चेहरा आईना ए दिली जजबात यार होता है।। मनोहर सतोगिया
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