पूनम की शबनमी चाँदनी है
वसुन्धरा का सोलह श्रंगार है
जिन्दगी की किश्ती की पतवार है
कभी रविवार कभी सोमवार है
वसुन्धरा का सोलह श्रंगार है
जिन्दगी की किश्ती की पतवार है
कभी रविवार कभी सोमवार है
बहुत कुछ कहती है मेरे यार खामोशी तुम्हारी । चेहरा आईना ए दिली जजबात यार होता है।। मनोहर सतोगिया
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